Saturday, 19 November 2016

Ke Jab Tum Laut Kar Aao

हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद,
जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायद
वो बरगद का पेड़ जहां दोनों छुपकर मिला करते थे,
वो बाग जहां सब फूल तेरी हंसी से खिला करते थे,
वो खिड़की जहां से छुपकर तुम मुझे अक्सर देखा करती थी,
वो गलियां जो हम दोनों की ऐसी शोख दिली पर मरती थीं,
वो बरगद,वो गलियां, वो बाग बियाबान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ
खेत-खलिहान तक तुमको बंजर मिले,
मेरी दुनिया का बर्बाद मंजर मिले,
ख्वाबों के लहू और लाशें मिलें,
और तुम्हारी जफाओं का खंजर मिले,
तबाहियों का ऐसा पुख्ता निशान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ
यहां जो हंसता मुस्कुराता मेरा आशियाना था,
जिसके हर ज़र्रे में बस तुम्हारा ठिकाना था,
ये शहर जो मेरे साथ मुस्कुराया करता था,
मेरे साथ तुम्हारे बाजुओं में बिखर जाया करता था,
वहां उजड़ा हुआ शहर, खंडहर सा इक मकान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ
तुम आओ तो शायद ना मिलें ये बाग बहारें,
ये शहर मिले ना मिलें मेरे घर की दीवारें,
तुम बहार थी मैं फूल था मैं अब नहीं खिलूं,
के जब तुम लौट कर आओ तो शायद मैं नहीं मिलूं,
मगर कंधे पर अपनी लाश ढोता एक इंसान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ

Ek Meetha Ehsas

प्यार का पता नहीं की वो क्या होता है। पर जब हम मिलते हैं
एक अजनबी से तो सब कुछ बदल जाता है।
उसकी छोटी छोटी बाते बहुत हँसाती हैं।
और दिल है की एक खुद की ही दुनिया बसा लेता है।
शायद किसी अजनबी का साथ जो दिल को अच्छा लगने लगे वही प्यार होता है।
चलिये  प्यार के कुछ ऐसे ही रंग तलाशते हैं
एक नये प्यार की सुगबुगाहट हुई, दिल से दिल की कुछ बात हुई,
कशमकश में था ये दिल मेरा की कैसे ये दिल की हालत हुई,
सोचती रही रात भर तुमको,और सुबह की भी आहट हुई,
हिम्मत करके दिल ने मुझे संभाला,
और घबराते हुए बातो की शुरुआत हुई,
मैँ थी घबराई पर देखा जब पहली बार तुमको,
दिल में पुरानी सी जान पहचान सी निकल आई,
दिल बस तुमको ही सुने लगा।हर वक़्त तुमको ही जीने लगा,
कैसे ये दिल वगावत कर बैठा जो तुमसे मिलने चली आई,
होके मजबूर दिल से बस आके तुझमे समाई,
तुम्हारी हर बात अच्छी लगती है शहद सी घुली लगती है,
जो हुआ न था आज तक क्या वो मुझको हो गया,
ए मेरे अजनबी हमसफ़र क्या तुमसे प्यार हो गया,
अब तो तेरा जिक्र आते ही हया का एहसास होता है,
घूंघट में शर्म के छुपके दिल का हाल बेहाल होता है,
दोस्तों की बातों में भी वो हँसी नहीं  आती,
पर जिक्र आते ही तेरा हँसी मुझमें कहीं बस सी जाती है,
जो नाम था अजनवी आज वो अपना हो गया,
कोरे कागज पे हाँथो से लिख देती हूँ,
हथेली को मेहबूब की मेहंदी में घोल देती हूँ,
कैसा ये हाल बेहाल हो गया शायद  उस अजनबी से प्यार हो गया,
अब तो हर वक़्त तेरा ही ख्याल रहता है,
शाम से ही ढली रात का इंतज़ार रहता है,
उन्ही के ख्याल पर दिल हैरान रहता है,
बस देख लूँ एक बार फिर उनको यही दिल बार बार कहता है,
हाल ये मेरा कैसा हो गया है,शायद उस अजनबी से प्यार हो गया है,
एक पल में कोई अपना बना गया,
जो मेरा था दिल का चैन वो चुपके से ही चुरा गया,
एक बार कहा उसने आँखे तुम्हारी खूबसूरत हैं,
होंठ  भी बेमिसाल हैं, सादगी के रंगो से सजी हो तुम,
इतना तो मैं भी नही जानती थी खुद को जितना वो मुझको बता गया,
मुझमे समाके खुद से बेगाना बना गया,
शायद यही तो प्यार है की एक अजनबी कैसे अपना हो जाता है,
उसकी छोटी छोटी बातों पे भी प्यार नजर आता है,
करेला था जो कडुवा कभी वही शहद सा मीठा हो जाता है,
होता है जो अजनबी बरसों से दूजे पल वही दिल में समाता है,
उसी अजनबी से प्यार हो जाता है।

Humsafar Ka Intzar

दिल को इंतेजार है उस हमसफ़र का जो आने वाला है,
जो मेरे ख्वाबों की दुनिया का राजकुमार बनें वाला है,
जिस के आने की आहट ही दिल को बेताब कर जाती है,
नजरें खुद-बा-खुद झुक जाती हैं,
पलकें उठाऊँ तो आइना भी ठिठोलिया किया करता है,
पूछता है किसने बढ़ाई है ये गालोँ की रंगत,
किसने जगाई है ये इश्क़ की चाहत,
कितना हँसा करता है,
अब कैसी है बेताबी आईने को बताऊँ कैसे,
किस कदर बह रहा है
हसरतों का तूफ़ान ये जताऊं कैसे,
कैसे कहूँ की दिल करता है
आँखों में काजल सजाऊँ,
होंटों पे शबनमी इश्क़ की लाली लगाऊँ,
सीने से लगाके उसको बस उसके प्यार में खो जाऊँ,
अब कैसे कहूँ किस कदर दिल बेकरार है,
दिल को सायद किसी हमसफ़र का इंतेजार है।

Wednesday, 5 October 2016

सपने तभी पूरे होते हैं......

  • सपने तभी पूरे होते हैं, जब सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की जाए. वरना सपने देखते-देखते हीं जिंदगी गुजर जाती है और  कोई भी सपना पूरा नहीं होता है.
    दिन-रात मेहनत → सपने पूरे………….
  • सपनों को ख्वाबों से हकीकत की जमीन पर उतारने के लिए, पूरी दुनिया को भूल कर कठिन परिश्रम करना पड़ता है.
  • लोग तबतक आपके सपनों का तबतक मजाक उड़ाते हैं, जबतक आप सपने को हकीकत में नहीं बदल देते हैं. और जब आप सफल हो जाते हैं तो आपका मजाक उड़ाने वाले लोग भी आपकी तारीफ में कसीदे पढ़ने लगते हैं. 
  • अगर आप चाहते हैं कि आपके सपने पूरे हों, तो सबसे पहले आपको सपने देखने होंगे. – अब्दुल कलाम
  • जिन्हें सपने पूरे करने की लत लग जाती है, वो दिन-रात देखे भी काम करते हैं.
  • जिन लोगों की आँखों में सपने नहीं होते हैं, वे साधारण जिंदगी जीते हुए मर जाते हैं.
  • अगर आप केवल सपने देखेंगे और उन्हें पूरे करने के लिए कोई कोशिश नहीं करेंगे, तो आपकी जिंदगी बदतर होती चली जाएगी.
  • जो लोग खतरा उठाने की हिम्मत करते हैं, केवल उन्हीं लोगों के सपने पूरे होते हैं.
  • कुछ बनने के नहीं, कुछ करने के सपने देखो.
  • जिसे अपने वर्तमान को बर्बाद करने की आदत हो, उनके सपने आँखों में हीं दम तोड़ देते हैं.
  • ये जिंदगी खुद एक खूबसूरत सपना है, लेकिन जिंदगी की भागदौड़ में हम इस सुनहरे सपने को जीना भूल जाते हैं.
  • सपने बीज की तरह होते हैं. जैसे हर बीज बड़े पेड़ में नहीं बदलता, वैसे हीं हर सपना सफलता में नहीं बदल पाता है.
  • मेहनत के बिना सपने अपना महत्व खो देते हैं.
  • अच्छे लोगों के सपने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.
  • सच्चे प्यार को पाना ज्यादातर लोगों के लिए एक सपना हीं रह जाता है. और वे हालात के साथ समझौता कर लेते हैं.

क्या लिखूं ?

क्या लिखूं   ?
मन की कहानी लिखूं
या आँखों का पानी लिखूं
क्या लिखूं  ?
तितलियों का शरमाना लिखूं
या भँवरो का गुनगुनाना लिखूं
क्या लिखूं   ?
हवाओं की झनकार लिखूं
या कोयल के गीत सदाबहार लिखूं
क्या लिखूं   ?
बादलो में चाँद का छिप जाना लिखूं
या सूरज का हर रोज मुस्कुराना लिखूं
क्या लिखूं   ?
धरती का श्रृंगार लिखूं 
या बूंदों का उपहार लिखूं
क्या लिखूं   ?
फूलों की महक लिखूं
या पत्तों की खनक लिखूं
क्या लिखूं   ?
गंगा की पावनता लिखूं
या नारी की शालीनता लिखूं
क्या लिखूं   ?
दीपक का जलना लिखूं
या अंधकार चीरकर आलोक का पथ गढ़ना लिखूं
क्या लिखूं   ?
तारों का टिमटिमाना लिखूं
या मेरा उन्हें निहारते जाना लिखूं
क्या लिखूं   ?
पंछियों का चहचहाना लिखूं
या कलियों का चटकना लिखूं
क्या लिखूं   ?
मंदिर की घंटियों की आवाज लिखूं
या मस्जिद की अजान का आगाज लिखूं
क्या लिखूं   ?
सरिता का निरंतर बहना लिखूं
या झरने का पहाड़ों से गिरना लिखूं
क्या लिखूं   ?
सर्दियो की भीनी धूप का एहसास लिखूं
या रात में पड़ती ओस का आभास लिखूं
क्या लिखूं   ?
सावन की रंगीली बहार लिखूं
या पतझड़ के मौसम का संहार लिखूं
क्या लिखूं   ?
हवाओं की मीठी धुन सुनाना लिखूं
या फसल का उस पर लहराना लिखूं
क्या लिखूं   ?
पतंगे का लौ के प्रेम में मिट जाना लिखूं
या सूर्यमुखी का भानु से नयन मिलाना लिखूं
क्या लिखूं   ?
कृष्ण की बांसुरी का संगीत लिखूं
या मीरा की उनसे प्रीत लिखूं
क्या लिखूं   ?
गुरु के चरण स्पर्श का अद्भुत सार लिखूं
या माँ के कोमल स्पर्श में बसा प्यार लिखूं
क्या लिखूं   ?
बचपन के लड़कपन का जमाना लिखूं
या बारिशो में वो बेवजह का छपछपाना लिखूं
क्या लिखूं…………………………….
क्या लिखूं…………………………….
क्या लिखूं…………………………….

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा

क्या हुआ जो देर हो रही, एक मुकाम पाने में
क्या हुआ जो  देर हो रही, जिंदगी आसान बनाने में
क्या हुआ जो  देर हो रही, किसी रास्ते पर चल पाने में
क्या हुआ जो  देर हो रही, खुद को साबित कर पाने में
क्या हुआ अगर  देर हो रही है, अपने सपनों की दुनिया सजाने में
देर से हीं सही, पर होगी कोई बात नई
तेरी आनेवाली जिंदगी होगी खुशियाँ भरी
क्यों मुस्कुराना भूलते हो, बीती बातों को याद करके  
क्यों उलझनों में झूलते हो, वर्तमान को बर्बाद करके  
दिल में जो ख्वाब हैं, उन्हें साकार करो तुम
अपने इरादों से दिन रात प्यार करो तुम
तुझमें दम है…. तो खुद की दुनिया बनाओ तुम
जो किसी ने नहीं किया हो, कुछ ऐसा कर जाओ तुम
जो रुक गया जिंदगी के सफर में, यहाँ बस वही हारा 
जो चलता रहा जिंदगी में, वक्त ने खुद उसके जीवन को संवारा 
तुम भी जी लो जिंदगी के एक-एक पल को खुल कर  
क्योंकि जिंदगी ना मिलेगी फिर दोबारा.........

ज़िन्दगी की धूप-छाँव

कभी गम, तो कभी खुशी है ज़िन्दगी
कभी धूप, तो कभी छाँव है ज़िन्दगी . . . . . . .
विधाता ने जो दिया, वो अद्भुत उपहार है ज़िन्दगी
कुदरत ने जो धरती पर बिखेरा वो प्यार है ज़िन्दगी . . . . . .
जिससे हर रोज नये-नये  सबक मिलते हैं
यथार्थों का अनुभव कराने वाली ऐसी कड़ी है ज़िन्दगी . . . . . .
जिसे कोई न समझ सके ऐसी पहेली है ज़िन्दगी
कभी तन्हाइयों में हमारी सहेली है ज़िन्दगी . . . . . . .
अपने-अपने कर्मों के आधार पर मिलती है ये ज़िन्दगी
कभी सपनों की भीड़, तो कभी अकेली है जिंदगी . . . . . . .
जो समय के साथ बदलती रहे, वो संस्कृति है जिंदगी
खट्टी-मीठी यादों की स्मृति है ज़िन्दगी . . . . . . . .
कोई ना जान कर भी जान लेता है सबकुछ, ऐसी है ज़िन्दगी
तो किसी के लिए उलझी हुई पहेली है ज़िन्दगी . . . . . . . .
जो हर पल नदी की तरह बहती रहे ऐसी है जिंदगी
जो पल-पल चलती रहे, ऐसी है हीं ज़िन्दगी . . . . . . . .
कोई हर परिस्थिति में रो-रोकर गुजारता है ज़िन्दगी
तो किसी के लिए गम में  भी मुस्कुराने का हौसला है ज़िन्दगी . . . . . .
कभी उगता सूरज, तो कभी अधेरी निशा है ज़िन्दगी
ईश्वर का दिया, माँ से मिला अनमोल उपहार है ज़िन्दगी . . . . . . . .
तो तुम यूँ हीं न बिताओ अपनी जिंदगी . . . . . . . . 
दूसरों से हटकर तुम बनाओ अपनी जिंदगी 
दुनिया की शोर में न खो जाए ये तेरी जिंदगी . . . . . . .
जिंदगी भी तुम्हें देखकर मुस्कुराए, तुम ऐसी बनाओ ये जिंदगी.....